पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा दीपक राष्ट्रीय शिक्षा नीति ⏤ 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन, बजट में एतिहासिक वृद्धि, अनुशासन सूत्रिप्टीकरण और छात्र कल्याण केंद्रित नवाचारों के माध्यम से उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और पहुंचे दोनों को नहीं दीक्षा देने में सफल रहा है विश्वविद्यालय को महाविद्यालय में अकादमी सुधार शोध एवं नवाचार को बढ़ावा रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों का विस्तार तथा दुरुस्त और आदिवासी अनजाने तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है।
प्रमुख उपलब्धियां
वर्ष 2023 24 में उच्च शिक्षा विभाग का बजट 1212.75 करोड़ था, जो वर्ष 2025-26 मे बढ़कर ₹1822.75 करोड़ हो गया।
छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का कार्यान्वयन शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी परिवर्तन की दिशा में एक बड़ा कदम है। राज्य सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
छत्तीसगढ़ में इसके प्रमुख पहलुओं का विवरण नीचे दिया गया है:
1. स्कूली शिक्षा का नया ढांचा
छत्तीसगढ़ में शिक्षा के पारंपरिक '10+2' ढांचे के स्थान पर अब '5+3+3+4' व्यवस्था को अपनाया जा रहा है:
बुनियादी चरण (Foundational Stage): 3 साल की प्री-स्कूल शिक्षा (आंगनवाड़ी/बालवाड़ी) और 2 साल की प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 1 और 2)।
प्रारंभिक चरण (Preparatory Stage): कक्षा 3 से 5 तक, जिसमें खेल-कूद और गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया गया है।
मध्य चरण (Middle Stage): कक्षा 6 से 8 तक, जहाँ व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) और कोडिंग की शुरुआत की जा रही है।
माध्यमिक चरण (Secondary Stage): कक्षा 9 से 12 तक, जिसमें विषयों के चयन में लचीलापन और आलोचनात्मक सोच पर ध्यान दिया गया है।
2. स्थानीय भाषा और मातृभाषा पर जोर
छत्तीसगढ़ एक जनजातीय बहुल राज्य है, इसलिए यहाँ मातृभाषा में शिक्षा देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रारंभिक कक्षाओं में शिक्षा का माध्यम स्थानीय बोलियों (जैसे छत्तीसगढ़ी, हल्बी, गोंडी, कुड़ुख) में रखने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि बच्चों को समझने में आसानी हो।
3. व्यावसायिक शिक्षा की शुरुआत
NEP 2020 के तहत, छत्तीसगढ़ के स्कूलों में कक्षा 6 से ही व्यावसायिक कौशल (Vocational Skills) विकसित करने की योजना है। इसमें स्थानीय शिल्प, कृषि तकनीक और आधुनिक तकनीकी कौशल जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।
4. उच्च शिक्षा में बदलाव
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
बहु-प्रवेश और निकास (Multiple Entry and Exit): छात्र अब अपनी सुविधानुसार पढ़ाई छोड़ सकते हैं और वापस जुड़ सकते हैं। एक वर्ष पूरा करने पर प्रमाणपत्र (Certificate), दो वर्ष पर डिप्लोमा और तीन-चार वर्ष पर डिग्री प्रदान की जाएगी।
एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC): छात्रों के क्रेडिट डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेंगे, जिससे उन्हें एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरण (Transfer) लेने में आसानी होगी।
5. डिजिटल और नवाचारी प्रयास
राज्य में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम विकसित किए जा रहे हैं। साथ ही, शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि वे नई नीति की बारीकियों को समझ सकें।
मुख्य बिंदु:
समग्र मूल्यांकन: केवल अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि कौशल और व्यावहारिक ज्ञान के आधार पर रिपोर्ट कार्ड तैयार करना।
समावेशी शिक्षा: दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक समान शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना।
छत्तीसगढ़ में इस नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को न केवल डिग्री धारक बनाना है, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने योग्य और आत्मनिर्भर बनाना है।
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Thanks for reading: Gyan-khaoshal-aor-Anusandhan-ki-nayi-udaan, Sorry, my English is bad:)