बात पुरानी है। तब बस तीन ही रंग थे। लाल, पीला और नीला!
लाल रहता था हर लज़ीज़ वस्तु में, जैसे टमाटर, सेब, चेरी और आलूबुखारे।
पीले ने बनाया था सूरज को चमकदार जो मुस्कुराकर देता था रोशनी लगातार।
आसमान भी नीला था और समुंदर भी। पेड़ों से टपकती बारिश भी नीली ही थी।
तीनों पक्के दोस्त थे।
एक दिन उन्होंने कहा, "हमें और दोस्त चाहिए। चलो नए दोस्त बनाएँ।" और वे निकल पड़े दोस्तों की तलाश में।
और देखो क्या हुआ!
लाल और पीला साथ चले तो एक नया दोस्त मिला - नारंगी।
पीले और नीले ने हाथ मिलाया तो एक नया दोस्त मिला- हरा।
लाल और नीले के पास आते ही एक नया दोस्त मिला- बैंगनी।
और इस तरह उन्होंने दुनिया को बना दिया दोस्ताना और रंगीन।
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काले-काले, पानी वाले आसमान में बादल आए बोलो, कैसे आकर छाए
हवा पकड़कर, लाती सर-सर छाए जैसे काले कंबल कितने सुंदर लगते बादल
पेड़ों जैसे, भेड़ों जैसे लगते जैसे चलते घोड़े बन जाते हाथी के जोड़े
नन्हे जल-कण, गए भाप बन उसी भाप ने ठंडक पाई बादल बरसे, बरसा आई
करते गड़गड़, आते चढ़-चढ़ बिजली बादल को चमकाए अँधियारे में राह दिखाए
मोर मगन मन, छूम छननछन झूम झूमकर नाच दिखाए खुश हो होकर गाना गाए
बरसे बादल, कलकल छलछल तैर चली कागज़ की नैया पूँछ उठाकर भागी गैया।
लेखक -श्रीप्रसाद
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बारिश ! झमाझम बारिश ! लगातार बारिश ! छत पर झमाझम। घर में टप-टप। और आँगन में... छप-छपाक। गीला हो गया बिस्तर, अम्मा की साड़ी, और दादी का कंबला
गीला और सर्द हो गया पूरा शहर। लेकिन मैं, मेरे पास है छाता। छाते के भीतर मैं और सलीम। बिलकुल सूखे और गरम।
मैंने छाते में टिल्लू को भी बुलाया। अब टिल्लू बिलकुल सूखा। मैं और सलीम कुछ गीले-गीले से।
मैंने दयाल चाचू बड़ा छाता माँग लिया। अब सब छाते के अंदर। फिर लता और मोनू भी आ गए। बड़ा छाता पड़ गया छोटा।
दयाल चाचू से और बड़ा छाता ले आए। अब सब छाते के अंदर। शलीन और सनत भी आ गए। और बड़ा छाता पड़ गया छोटा।
दयाल चाचू से बहुत बड़ा छाता ले आए।
अब सब छाते के अंदर। सोनू, हामिद, हरमीत सब के सब आ गए। बहुत बड़ा छाता भी पड़ गया छोटा।
दयाल चाचू बहुत बड़े छाते से बहुत-बहुत बड़ा छाता दो। दयाल चाचू ने कहा- इससे बड़ा छाता तो बनता ही नहीं। बड़ा होकर मैं दुनिया का सबसे बड़ा छाता बनाऊँगा।
आसमान जितना बड़ा! जो बारिश में पूरे शहर को छुपा लेगा। टिल्लू, सलीम, अम्मा, चाचू, राकेश, हामिद, हरमीत, शलीन और सनत। सब होंगे छाते के भीतर। सूखे और गरम।
बारिश ! झमा-झम बारिश !
घर में टप-टप।
और आँगन में... छप-छपाका
लेखक - मनोज कुमार
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Thanks for reading: Bal kahaniyan motivated hindi, Sorry, my English is bad:)