आज हम बालवस्था के विकास के लिए एक सुंदर सा कहानी लेकर हाजिर हैं जो बच्चों को एक नयी दिशा की ओर लें जायेगी और एक अच्छी प्रेरणा मिलेगी इस कहानी से
मीना के परिवार में सात लोग हैं— उसके दादा, दादी, माता, पिता, चाचा,
मीना और उसका छोटा भाई दिवाकर। दिवाकर तीन साल का है। वह बहुत
नटखट और चलबुला है।
मीना को अपने भाई के साथ खेलने में बहुत
आनंद आता है। दिवाकर भागकर कमरे के
किवाड़ के पीछे छिप जाता है। मीना उसे ढूँढ़
लेती है तो वह ज़ोर-ज़ोर से हँसता है।
मीना उसे गिनती सिखाती है। दिवाकर कहता है,
“एक, दो, तीन, चार” तो मीना कहती है, “चाचाजी
हमको करते प्यार।”
तभी चाचाजी आ जाते हैं
और दिवाकर को गोद
में उठा लेते हैं।
मीना, चाचाजी और दिवाकर बरामदे
में जाते हैं जहाँ दादी और माँ फल काट
रही हैं। मीना के पिता और दादाजी
गमलों में पानी दे रहे हैं।
थोड़ी देर में माँ सबको फल देती हैं। सब लोग मिल-जुलकर कर खशी से फल
खाते हैं और आपस में बातें करते जाते हैं। कितना प्यार भरा है मीना का
परिवार!
लेखक - मालती देवी
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Thanks for reading: बाल कहानियां एक मेरी भी , Sorry, my English is bad:)