आज हम भुगोल (Geography) विषय के प्रयोगात्मक परीक्षाएं में आने वाला ग्राफ़ और मापक यंत्र जो सबसे महत्वपूर्ण बात है इस बारे में हम इस पोस्ट पर विस्तार से समझायेंगे तो बनें रहिए हमारे इस पोस्ट पर और पोस्ट से कुछ जानकारी मिले तो एक फिडबेक जरुर दें। तो चलिए शुरु करतें हैं
तो आपको पता है ग्राफ कितने प्रकार के होते हैं ? और यह ग्राफ का उपयोग कहां कहां की जाती है तो चलिए जानते हैं ग्राफ कितने प्रकार के होते हैं -
वितरण मानचित्रो में आंकड़ों को प्रदर्शन हेतु बैंड ग्राफ सबसे सरल विधि है। जब एक साथ अनेकों वस्तुओं का उत्पादन वितरण कई वर्षों का दिखाना होता है तो बैंड ग्राफ की रचना की जाती है।
वस्तुओं के उत्पादन तथा वितरण के अलावा यदि जनसंख्या की विभिन्न आंकड़ों का अनेकों वर्षों के आधार पर स्वरूप दर्शाया जाता है तो बैंड ग्राफ की रचना की जाती है । अन्य लेखक चित्रों की तरह बंद ग्राफ में भी दो क्षैतिज होते हैं। इसमें एक क्षैतिज या लंबवत भुजा पर दी हुई इकाई का मापक तथा दूसरे क्षैतिज अथवा उध्वाधार भुजा पर वर्ष दिखाए जाते हैं। बैंड ग्राफ दो प्रकार से बनाया जा सकता है एक क्षैतिज बैंड ग्राफ दूसरा लंबवत बैंड ग्राफ ।
बैंड ग्राफ पर सामान्य रूप से वितरण मानचित्रो का स्वरूप दिया जाता है। किसी वस्तु की उत्पादन, खनिज पदार्थों के अनेकों वर्षों के उत्पादन, विभिन्न उद्योगों के अनेकों वर्षों के उत्पादन तथा जनसंख्या की विभिन्न घटकों को दशाबद्धियों के आधार पर बैंड ग्राफ के द्वारा आसानी से दर्शाया जा सकता है यहां हम भारत में विभिन्न वर्षो की कृषि की प्रमुख फसलों के उत्पादन को बंद ग्राफ द्वारा दर्शा सकते हैं।
उदाहरण:-निम्नलिखित भारत की प्रमुख कृषि की प्रमुख फसलों के उत्पादन को बंद ग्राफ द्वारा दर्शाइए!
भारत की कृषि की प्रमुख फसलों का उत्पादन (1950-51 से 1970-71)
उदाहरण प्रश्न में दिए हुए भारत की कृषि की कुछ प्रमुख फसलों की विभिन्न वर्षो के उत्पादन को दिखाने के लिए एक लंबवत बैंड ग्राफ की रचना करनी है।उपरोक्त दिए हुए आंकड़ों की आधार पर एक बैंड ग्राफ की रचना कीजिए जिसमें एक तरफ कृषि फसलों का उत्पादन के आंकड़ों को वर्ष वार इस बैंड ग्राफ पर दर्शाए कृषि की विभिन्न फसलों अलग-अलग छाया द्वारा दर्शाइए। बैंड ग्राफ की बाईं और इन छाया का एक संकेत तैयार कर दीजिए यह हमारा बैंड ग्राफ हो गया ।
इसे क्लाइमोग्राम भी कहते हैं। यह ऐसा आरेख है जिसके द्वारा किसी स्थान की जलवायु संबंधी दशाओं की सामान्य जानकारी प्राप्त होती है। क्लाइमोग्राफ की कल्पना प्रोफेसर जे.बाल नेशन 1910 में की थी। इसके पश्चात सन् 1918 में जलवायु विज्ञान के प्रसिद्ध विद्वान डब्ल्यू कोपेन ने विश्व के जलवायु विभाजन मे जलवायु संबंधी कुछ आलेखों का निर्माण किया। इसके बाद जेबी लेली महोदय ने सन् 1926 मे कोपेन महोदय की विचारधारा को विकसित किया तथा तापमान वर्षा व प्राकृतिक वनस्पति के पारस्परिक संबंधों को क्लाइमोग्राम द्वारा प्रदार्शित किया। क्लाइमोग्राफ को अधिक लोकप्रियता भूगोल के विद्वान, ग्रीफिथ टेलर द्वारा मिली है। टेलर महोदय ने क्लाइमोग्राफ ग्राफ के माध्यम से दिखाने का प्रयास किया है। कि कौन से क्षेत्र जलवायु की दृष्टि से उपयुक्त है और कौन से नहीं है। इसे प्रमाणित करने के लिए आपने ऑस्ट्रेलिया की विभिन्न नगरों के क्लाइमोग्राफ बनाएं।
टेलर महोदय द्वारा प्रस्तुत क्लाइमोग्राफ की आधार भुजा पर सापेक्ष आद्रता तथा ऊर्ध्वाधर भुजा पर आद्र बल्व तापक्रम के मापक रखें गये है। किसी स्थान के बारह महीनो के आंध्र बल्व तापक्रम व सापेक्षिक आद्रता के आंकड़ों से प्राप्त निर्देशांक बिंदुओं को क्रमशः मिलाने पर जो आकृति बनती है उसे ही टेलर महोदय ने क्लाइमोग्राफ कहा है। टेलर महोदय ने अपने क्लाइमोग्राफ के चारों कोनों पर चार विशिष्ट शब्दों का प्रयोग किया है जो निम्न अर्थों में प्रयुक्त है -
क्लाइमोग्राफ के जलवायु वर्ग (टेलर)
| क्रमांक | प्रयुक्त शब्द | ग्राफ पर स्थित कोर्नर | आर्द्र बल्व तापक्रम °F | सापेक्ष आर्द्रता | मुख्य लक्षण | जलवायु प्रकार |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 1. | RAW शीतोष्ण आर्द्र |
दक्षिण -पूर्व | 40°F | 70% से अधिक | नम एवं शील | शीत |
| 2. | KEEN शुष्क कठोर |
दक्षिण -पश्चिम | 40°F से कम | 40% से कम | अति शुष्क एवं शील | शीत मरुस्थली |
| 3. | SCOR CHING प्रखर शुष्क |
उत्तर पश्चिम | 70°-80 °F |
40% से कम |
झुलसाने वाली | उष्ण मरुस्ली |
| 4. | MUGGY शुष्क तर |
उत्तर पूर्वी | 70°-80 °F |
70% से अधिक |
उष्ण एवं तर | उष्णार्द्र |
टेलर महोदय के अतिरिक्त आर लांग तथा ईई फास्टर महोदय ने भी कुछ विशिष्ट प्रकार के क्लाइमोग्राफ का निर्माण किया है, किन्तु यहां हम केवल टेलर महोदय के बहुचर्चित क्लाइमोग्राफ का ही वर्णन कर रहे हैं।
उदाहरण:- निम्नलिखित आंकड़े कोरबा के आद्र् बल्व तापक्रम व सापेक्षिक आद्रता को प्रदर्शित कर रहे हैं, इनके द्वारा क्लाइमोग्राफ अथवा जलवायु लेखाचित्र का निर्माण कीजिए।
उपरोक्त दिए गए आद्र् बल्व तापक्रम एवं सापेक्ष आंध्र तक के आधार पर एक क्लाइमोग्राफ तैयार किया गया है जिसकी एक भुजा का तापमान तथा दूसरी भुजा पर आद्रता प्रदर्शित किया गया है ।
हीदर ग्राफ
आंकड़ों को प्रदर्शित करने की कई विधियां हैं उनमें ग्राफ अथवा रेखा चित्र एक सरल एवं उत्तम विधि है इस विधि में हम दो इकाइयों के आंकड़ों का प्रदर्शन करते हैं प्राय हीदर ग्राफ में वर्ष अथवा माह के साथ जलवायु की दशाओं को दर्शाया जाता है हीदर ग्राफ का निर्माण विद्वान ग्रिफिथ टेलर ने अमेरिकी भूगोलवेत्ता ग्रिफिथ टेलर ने वर्ष 1960 में किया था। ग्राफ पेपर के क्षैतिज अक्ष पर औसत मासिक वर्षा की मात्रा तथा उत्व्राधर अक्ष पर औसत मासिक तापमान का मापक मानकर एक वर्ष वर्षा व तापमान के आंकड़ों को हीदर ग्राफ द्वारा प्रदर्शित किया था। हीदर ग्राफ किसी स्थान विशेष की सामान्य जलवायु दशाओं विशेष कर वर्ष एवं तापमान की जानकारी प्रदान करता है। टेलर द्वारा प्रस्तुत इधर क्राफ्ट विद्वान लॉन्ग फास्टर द्वारा प्रतिपादित क्लाइमोग्राफ का ही एक परिवर्तित रूप है क्लाइमोग्राफ में भी क्षैतिज अक्ष पर वर्ष तथा ऊर्ध्वाधर अक्ष पर तापक्रम को दिखाया गया है। ठीक इसी प्रकार हीदर ग्राफ के अंतर्गत वर्षा के प्रत्येक महीने के तापक्रम व वर्षा के संबंध को दिखाया जाता है। इस रेखा चित्र के उत्तर पूर्वी कोने कि जलवायु उष्ण एवं आंध्र, उत्तर पश्चिमी कोने की अति शीत तथा दक्षिणी पूर्वी कोने की सीत आद्र होती है। जिससे हम क्षेत्र विशेष की जनजीवन पर जलवायु की दशाओं की प्रभाव की जानकारी सहज रूप में जान लेते हैं ।
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Thanks for reading: भुगोल विषय के लिए ग्राफ की पुरी जानकारी हिंदी में , Sorry, my English is bad:)