आज हम भुगोल के सुदूर संवेदन को समझने का प्रयास करेंगे आखिर सुदूर संवेदन का अर्थ परिभाषा एवं विषय क्षेत्र में इसका प्रयोग क्यों होता है। तों चलिए इसे विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं।
सुदूर संवेदन का परिचय
मानव हमेशा प्रगतिशील रहा है। मनुष्य का हमेशा से यही जिज्ञासा रही है कि ब्रह्मांड और अंतरिक्ष के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त की जाए । प्राचीन काल में ग्रहों, नक्षत्रों,निहारिकाओ,उल्काओ, उपग्रहों, धुमकेतु आदि को देखने के लिए दुरबिन का प्रयोग किया जाता था,परन्तु आज सुदूर संवेदन के अन्तर्गत ऐसे तकनीकी, उपकरण विकसित हो गये है जिनके द्वारा ब्रह्मांड की छोटी से छोटी गतिविधियों व घटनाएं को देखा जा सकता है।
वायुयानों तथा मनुष्य द्वारा निर्मित उपग्रहों के विकास व वृद्धि ने सुदूर संवेदन के क्षेत्र में अद्भुत क्रांति ला दी है। आधुनिक विकसित उपकरणों को वायुयानों तथा उपग्रहों में रखकर दुर से ही पृथ्वी के प्रतिबिम्ब को लिया जाता है तथा सूचनाएं एंव आंकड़े प्राप्त किये जाते हैं। उपग्रह विकास के पूर्व, अन्तरिक्ष से सुचनाएं प्राप्त करने का कार्य स्वत प्रेक्षण तथा प्रकाश फोटोग्राफी तक सीमित था। सन् 2012 से विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों के एम.ए. भूगोल के पाठ्यक्रम मे एक विषय सुदूर संवेदन भी रखा गया है।
सर्वप्रथम सुदूर संवेदन शब्द का प्रयोग 1960 के दशक मे किया गया था। सुदूर संवेदन का अर्थ है किसी दुर स्थित वस्तु, धरातल व घटना के बारे सूचनाएं अथवा आंकड़ों को प्राप्त करना। दूसरे शब्दों में मोटे तौर पर सुदूर संवेदन का अर्थ है बिना किसी भौतिक सम्पर्क के किसी वस्तु एवं घटना के संबंध में सूचनाएं एकत्र करना।
सुदूर संवेदन एक ऐसा विज्ञान है जो पृथ्वी के किसी स्थान की वस्तु अथवा घटना के संबंध में दूर अंतरिक्ष में स्थित उपग्रह या अंनतिरिक्ष मानो पर लगीं संवेदकों के द्वारा ग्रहण किये गये धरातलीय परावत्रित प्रकाश के आवेगों को अंकित करता है।
बैरेट एंव कर्टीस के अनुसार - "किसी निश्चित दुरी से किसी युक्ति द्वारा किसी लक्ष्य के अवलोकन को सुदूर संवेदन कहते हैं।"
"Remote sensing is the observation of a target by a device separate from it by some distance."
सिमोनेट के अनुसार - "बिना स्पर्श या सम्पर्क के किसी वस्तु के बारे में भौतिक आंकड़ों की प्राप्ति करना सुदूर संवेदन कहलाता है।"
"Remote sensing is the acquisition of physical data of an object without touch or contact."
फिसचरे के अनुसार - "सुदूर संवेदन एक ऐसी कला या विज्ञान है जो बिना किसी सम्पर्क के किसी वस्तु के बारे में जानकारी प्राप्त करता है।"
सुदूर संवेदन के विषय क्षेत्र एवं महत्व
सुदूर संवेदन विधि द्वारा एक बड़े क्षेत्र का मापन अधिक कम समय में किया जा सकता है । पिछले लगभग 20 वर्षों में विभिन्न क्षमताओं के सुदूर संवेदन उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित किए गए हैं, जिससे निरंतर सुदूर संवेदन आंकड़े प्राप्त किया जा रहे हैं। इन आंकड़ों का सॉफ्टवेयर द्वारा विश्लेषण करके भूमि से संबंधित अनेक मानचित्र बनाए जा सकते हैं। परंतु जल संसाधन के उपयुक्त प्रबंधन के लिए उपयोग में ले जा रहे निर्देशों तथा अन्य वीडियो के लिए सुदूर संवेदन आंकड़े प्राप्त नहीं है। इन आंकड़ों का उपयोग करने हेतु भौगोलीय सूचना तंत्र प्रणाली एक आधुनिक तकनीक है । सूदूर संवेदी और भौगोलिय सूचना तंत्र प्रणालियों का जल संसाधन एवं प्रबंधन के अनेक क्षेत्रों, जैसे भू-उपयोग, बाढ़ मैदान प्रबंधन,जल विभाजकों,भूजल अध्ययन इत्यादि में अत्यधिक उपयोगी किया जा रहा है।इस प्रपत्र में सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना तंत्र तकनीकी के उपयोग पर प्रकाश डाला गया है।
सुदूर संवेदन की प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूर्व होती है -
(1) आंकड़े अर्जित करना - यद्यपि आंकड़े अर्जित करने की विधियों को आगे विस्तार से समझाया गया है परन्तु यहां इनका संक्षिप्त विवरण दिया गया है। सर्वप्रथम संवेदक द्रारा पृथ्वी या पृथ्वी के किसी भी भाग को या किसी वस्तु के संबंध में विद्युत चुम्बकीय विकिरण द्वारा सुचनाएं अंकिय रुप में एकत्र किए जाते हैं। दूसरा इन अंकिय आंकड़ों से सहायता से प्रतिबिम्ब तैयार किए जाते है जिन्हें चित्रीय रुप भी कहते हैं। टी.एम.लिलिसेंट एंव आर डब्ल्यू काइफर ने आंकड़ा अर्जित करने की प्रक्रिया को पांच रुपों में विभाजित किया है -
1.उर्जा के स्रोत
2. वायुमंडल द्वारा संचरण
3.पृथ्वी की धरातलीय आकृतियां
4. वायुमंडल द्वारा पुनः संचारण
5.संवेदन प्रणालियां
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Thanks for reading: सुदूर संवेदन का अर्थ एवं परिभाषा और विषय क्षेत्र , Sorry, my English is bad:)