कृष्ण देवराय अपने कवियों तथा विद्वानों के संरक्षण के लिए जाने जाते थे। वे उतना ही ललित कला के भी शौकीन थे।
एक बार उन्हें एक बहुत ही विद्वान चित्रकार के बारे में मालूम हुआ जिसका नाम राज वर्मा को दरबार में बुलाया और उससे अपना चित्र बनाने को कहा।
जब उसका चित्र पूरा हो गया, राजा कलाकार से बहुत प्रसन्न हुआ। चित्र में एक प्रभावशाली तथा खुबसूरत राजा फ्रेम जीवंत बाहर आ रहा था।
यह चित्र अलग था, राज वर्मा ने पुराण से प्रसिद्ध पुरुषों तथा महिलाओं "व अन्य चरित्रों की कल्पना कर बनाया था। वह अपने कौशल के लिए काफी प्रसिद्ध हो गया। वह राजा के बहुत नजदीक तथा प्रिय हो गया।
खुशी से भावविभोर होकर कृष्ण देवराय ने चित्रकार को बुलाया तदा उससे पूछा वह क्या चाहता है (पुरस्कार के रूप में)। जब राज जी ने उता नहीं दिया, राजा स्वयं उदारतापूर्वक सोचते हुए उसे मुख्यमंत्री के पद में पुरस्कृत किया।
यद्यपि राज वर्मा एक अच्छा और बुद्धिमान विचत्रकार था, उसे प्रसन क्या होता है अनुभव नहीं था। उसके शीघ्रता में लिए गये निर्णय तथा राज्य के मामलों में खराब प्रबन्ध से जल्द ही सब कुछ अनियमित हो गया। यद्यपि लोग उसके प्रबन्धन से खुश नहीं थे, राजा से शिकायत का साहस नहीं था क्योंकि राजा उसे बहुत पसन्द करते थे।
शहर के बड़े बुजुर्ग अंततः नए और अयोग्य मुख्यमंत्री से छुटकारा पाने की सहायता के लिए ढूंढते हुए तेनाली रामा के पास पहुँचे।
बेनाली रामा ने उन्हें विश्वास दिलाया, "मैं जल्द ही चित्रकार को मुख्यमंत्री के पद से हटाने का सुरक्षित रास्ता ढूंढ लूँगा।"
कुछ सप्ताह बाद, तेनाली रामा ने राजा रानी और दरवार के कुछ लो को अपने घर भोज पर बुलाया। उसी समय उसे एक बहुत अच्छा बदाई गिला और उसे राजा के लिए दावत बनाने के महान काम पर रख लिया
राजा और अन्य सभी भोजन के लिए बैठे और तेनाली राम के आदेश से बढ़ई ने उन्हें भोजन परोसना शुरू किया। जैसे ही वे भोजन का पहला कर निवाला) अपने मुख में ले गये सब बार-बार पानी के लिए निवेदन करने लगे
जल्द ही भोजन चखने के बाद राजाको वास्तविकता का पता लगा कि भोजन बेस्वाद बना था तथा असहनीय लोखा था। वह क्रोधित हुए।
"रामा, यह भोजन किसने बनाया है? क्या तुम चाहते हो हम सब इस भयानक भोजन को खाकर तकलीफ में पड़े या मर जाये ?"
अपने सहज विनम्र भाव से तेनाली रामा ने कहा, "मैं आपसे क्षमता हूँ।" तब यह बढ़ई को राजा के सामने से आया।
मैंने इसके जैसा शानदार बबर्ष कभी नहीं देखा, और इसलिए मैंने उसे आज को दावत का भोजन बनाने के लिए काम पर रख लिया।"
राजा ठहाका लगाकर हँसने लगे। क्या तुमने पूरी समझो है रामा ? एक अच्छे बढ़ई को लकड़ी के काम पर रखना चाहिए किन्तु भोजन पर नहीं। तुम्हें यह मजाकिया विचार कैसे आया?
तेनाली रामा ने राजा से पूछा 'भगवन । यदि एक चित्रकार मुख्यमंत्री बन सकता है,तो एक बढई रसोईया क्यों नहीं बन सकता ? राजा तत्काल समझ गये कि तेनाली रामा ने बढ़ई को भोजन पकाने के लिए इसलिए लगाया ताकि उसे (राजा को) यह महसूस हो कि राज वर्मा को मुख्यमंत्री बनाकर उसने (राजा ने) गलती की है।
राजा, राज वर्मा को पद से हटाने के संशय से बच गये क्योंकि जब राज वर्मा ने रामा के घर पर हुए असामान्य घटना के बारे जाना, उसने तुरन्त पद से इस्तीफा दे दिया।
संरक्षण के लिए जाने जाते एक बार उन्हें एक बहुत ही राज वर्मा था। उन्होंने राज नाने को कहा।
बाद में राज वर्मा ने तेनाली रामा से कहा कि वह एक चित्रकार बने रहने में खुश है।
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Thanks for reading: Measure of Measur | मापदण्ड का पैमाना, Sorry, my English is bad:)