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धीरूभाई अंबानी और उनके उत्तराधिकारी मुकेश अंबानी, जिन्होंने भारतीय उद्योग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।

    🔹 भूमिका : भारत व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। इस पहचान को बनाने में कुछ महान उद्योगपतियों का अहम योगदान रहा है। उन्हीं में से एक हैं — धीरूभाई अंबानी और उनके उत्तराधिकारी मुकेश अंबानी, जिन्होंने भारतीय उद्योग को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। 🔹 धीरूभाई अंबानी का जीवन परिचय : धीरजलाल हीराचंद अंबानी का जन्म 28 दिसंबर 1932 को जूनागढ़ (गुजरात) में हुआ था। वे एक सामान्य परिवार से थे और छोटी उम्र में ही उन्होंने पेट्रोल पंप पर काम करना शुरू किया। लेकिन उनके भीतर बड़ा सपना और असीम मेहनत की ताकत थी। इसी लगन ने उन्हें रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की स्थापना करने के लिए प्रेरित किया, जो आगे चलकर भारत की सबसे बड़ी कंपनी बनी। 🔹 मुकेश अंबानी : धीरूभाई अंबानी के बड़े पुत्र मुकेश धीरूभाई अंबानी का जन्म 19 अप्रैल 1957 को हुआ। मुकेश अंबानी ने अपने पिता के सपनों को न केवल आगे बढ़ाया बल्कि उन्हें कई गुना बड़ा बना दिया। उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शी सोच के कारण आज रिलायंस इंडस्ट्रीज पेट्रोलियम, दूरसंचार, रिटेल, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्रों में विश्व-स्तर पर चमक...

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के वो तेजस्वी सूर्य हैं

हैलो दोस्तो आप सबका इस पोस्ट पर वेलकम आज हम रामधारी सिंह दिनकर के बारें में पढ़ेंगे एवं उनके लिखें हुए कविताएं भी पढ़ेंगे !  रामधारी सिंह 'दिनकर' — राष्ट्रीय कवि की गर्जना 🇮🇳✨ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के वो तेजस्वी सूर्य हैं जिन्होंने अपने शब्दों से पूरे भारत को जागरूक किया। उनकी कविताएँ केवल पंक्तियाँ नहीं, बल्कि देशभक्ति, साहस और आत्मसम्मान की पुकार हैं। दिनकर जी को "राष्ट्रीय कवि" कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने अपनी कविताओं से आज़ादी की लड़ाई के समय भारतीय जनमानस में जोश और आत्मबल जगाया। उनकी रचनाएँ जैसे — 👉 “रश्मिरथी”, 👉 “परशुराम की प्रतीक्षा”, 👉 “हुंकार”, 👉 “सामधेनी”, आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर गूंजती हैं। --- 🔥 उनकी एक प्रसिद्ध कविता की झलक: > “हठ कर बैठा चांद एक दिन माता से यह बोला,सिलवा दे मां मुझे उन का मोटा एक झिंगोला " ये कविता कि एक लाईन हैं। सन् 1962 में जब बीन ने भारत पर आक्रमण किया था और उसमें हमारे देश की पराजय हुई थी, तो दिनकर का मन दुख से भर उठा। दिनकर राष्ट्रवादी क्रानि हैं। इस पराजय के लिए उन्होंने देश के राजनीतिक नेतृ...

Class1 to 3 tak baal pothi

बाल पोथी — रंग, सीख और खेल बाल पोथी रंग, सीख और छोटे-छोटे खेल — पहले वर्ष के बच्चों के लिए प्रस्तुति: आपका नाम / संस्थान पढ़ें, खेलें और छपाइए — पारंपरिक सीख का आधुनिक तरीका विषय-सूची अक्षर परिचय (क — अ) संख्याएँ (1 — 10) छोटी कहानी: "नन्हा मोती" कविता: "आओ मिलकर गाएँ" रंग भरो — चित्र लिखने की प्रैक्टिस पंक्तियाँ हिन्दी वर्णमाला — परिचय पहले कुछ अक्षर — हर अक्षर के साथ एक छोटा उदाहरण शब्द। माता-पिता से कहें कि बच्चों को बोलकर भी बताएं। अ अ — अनार आ आ — आम इ इ — इमली ई ई — ईख उ उ — उल्लू ऊ ऊ — ऊँट क क — केला ख ख — खरगोश ग ग — गाय घ घ — घड़ी नोट: आप और अक्षर व चित्र जोड़ सकते हैं — हर टाइल में छोटे चित्र लगाने से बच्चे जल्दी सीखते हैं। संख्याएँ 1 ...
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B.A. Part-II (Two) Term End Examination, 2021-22 HINDI LITERATURE Paper-I

"Sant Gahira Guru Vishwavidyalaya Syllabus Latest Update: BA, BSc, BCom, PG, Diploma, B.Ed सहित सभी कोर्सेज का नया सिलेबस, यूनिट-वाइज डिटेल, PDF लिंक
संत गहिरा गुरु सरगुजामहाविद्यालय


 AA-1052

(002) B.A. Part-II (Two)

Term End Examination, 2021-22

HINDI LITERATURE

Paper-I

[Time : 3 hours] [Maximum Marks : 75]



📚 बी.ए. हिंदी साहित्य (प्रश्न पत्र-1): महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर और व्याख्याएँ 📝

बी.ए. हिंदी साहित्य, प्रश्न पत्र-1 (AA-1052) की परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह पोस्ट अत्यंत उपयोगी है। यहाँ दिए गए प्रश्न, महत्त्वपूर्ण कवियों और साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों पर आधारित हैं।

खंड 'अ': सप्रसंग व्याख्या (इकाई-1)

निर्देश: निम्नलिखित में से किन्हीं तीन की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। (7x3 अंक)

1. (क) वे सजग रहते थे सदा...

पद्यांश:

"वे सजग रहते थे सदा, दुख-पूर्ण तृष्णा भ्रांति से,

जीवन बिताते थे सदा संतोष-पूर्वक शांति से ।

इस लोक में उस लोक से वे अल्प सुख पाते न थे,

हँसते हुए आते न थे, रोते हुए जाते न थे ।।"  

व्याख्या:

संदर्भ: यह पद्यांश मैथिलीशरण गुप्त की प्रसिद्ध रचना 'भारत-भारती' से लिया गया है। इसमें कवि ने भारत के अतीत के गौरवशाली मनुष्यों के जीवन और उनके उदात्त चरित्र का वर्णन किया है।  

प्रसंग: कवि बताते हैं कि हमारे पूर्वज किस प्रकार भौतिक सुखों और मोह-माया से परे एक संतुलित और आध्यात्मिक जीवन जीते थे।  

भावार्थ: वे (पूर्वज) सदैव दुःख से भरी लालसा और भ्रम से सजग (जागरूक) रहते थे। उनका जीवन संतोष और शांति से भरा होता था। वे न तो इस संसार में और न ही परलोक में क्षणिक (अल्प) सुखों के पीछे भागते थे। उनका जन्म और मृत्यु दोनों ही शांत और संतुलित थे—न वे हँसते हुए आते थे, और न रोते हुए जाते थे। यह पंक्तियाँ जीवन के प्रति उनकी समतावादी दृष्टि को दर्शाती हैं।  

2. (घ) लपकती हैं लाखों तलवार...

पद्यांश:

"लपकती हैं लाखों तलवार, मचा डालेंगी हाहाकार,

मारने-मरने की मनुहार, खड़े हैं बलि पशु सब तैयार

किन्तु क्या कहता है आकाश, हृदय हुलसो सुन यह गुंजार,

पलट जाए चाहे संसार, न लूँगा इन हाथों हथियार ।"  

व्याख्या:

संदर्भ: यह पंक्तियाँ संभवतः माखनलाल चतुर्वेदी अथवा किसी राष्ट्रीय-सांस्कृतिक चेतना के कवि की हैं, जो गाँधीवादी अहिंसा और आत्म-बलिदान के आदर्श को दर्शाती हैं।  

प्रसंग: यहाँ भीषण युद्ध के माहौल का वर्णन है, जहाँ युद्ध की तैयारियाँ चरम पर हैं, लेकिन कवि का आत्मिक स्वर युद्ध से विमुख होकर शांति का संदेश दे रहा है।  

भावार्थ: लाखों तलवारें चमक रही हैं और हर तरफ़ हाहाकार (शोर/तबाही) मचाने को तैयार हैं। चारों ओर लोग मरने-मारने के लिए तैयार खड़े हैं, मानों स्वयं को बलि देने वाले पशु हों। ऐसे समय में, कवि आकाशवाणी को सुनता है, जो हृदय को आह्लादित (प्रसन्न) करने वाली गुंजार है। यह गुंजार आत्मिक शक्ति का संदेश देती है, जिसके कारण कवि दृढ़ संकल्प लेता है कि चाहे संसार पलट जाए, वह अपने हाथों में हथियार नहीं उठाएगा (अहिंसा का मार्ग अपनाएगा)।  

खंड 'ब': सैद्धांतिक और आलोचनात्मक प्रश्न (इकाई 2, 3, 4)

1. मैथिलीशरण गुप्त का साहित्यिक परिचय (इकाई-2)

मैथिलीशरण गुप्त द्विवेदी युग के सबसे महत्त्वपूर्ण कवि माने जाते हैं। उन्हें राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 'राष्ट्रकवि' की उपाधि दी थी।  

प्रमुख रचनाएँ: 'भारत-भारती' (राष्ट्रीय चेतना की आधारशिला), 'साकेत' (उर्मिला के त्याग पर आधारित महाकाव्य), 'यशोधरा' (गौतम बुद्ध की पत्नी के त्याग का वर्णन), 'जयद्रथ वध'।  

काव्यगत विशेषताएँ:

राष्ट्रीय चेतना: उन्होंने भारतीय इतिहास और संस्कृति के गौरव को पुनः स्थापित किया।

मानवतावाद: उनके काव्य में नारी-पात्रों (उर्मिला, यशोधरा) को विशेष स्थान मिला, जो उनके मानवतावादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।

विषय-वस्तु: इतिवृत्तात्मकता (कथात्मकता) और आदर्शवाद उनके काव्य की मुख्य विशेषताएँ हैं।

2. सुमित्रानंदन पंत जी की काव्यगत विशेषताएँ (इकाई-3)

सुमित्रानंदन पंत छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उन्हें 'प्रकृति के सुकुमार कवि' कहा जाता है।  

विशेषताएँ:

प्रकृति चित्रण: उन्होंने प्रकृति को केवल पृष्ठभूमि न मानकर एक सजीव और मानवीय सत्ता के रूप में चित्रित किया।  

सौंदर्य और प्रेम: उनके काव्य में लौकिक और अलौकिक दोनों प्रकार के सौंदर्य और प्रेम की अभिव्यक्ति है।  

काल्पनिकता और रहस्यवाद: पंत जी के शुरुआती काव्य में कल्पना की प्रधानता और रहस्यवादी भावना दिखाई देती है।

नवीनता: उन्होंने भाषा, छंद और बिम्बों के प्रयोग में नवीनता को अपनाया।  

प्रमुख रचनाएँ: 'वीणा', 'पल्लव', 'गुंजन'।  

3. अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की काव्यगत विशेषताएँ (इकाई-4)

'हरिऔध' जी द्विवेदी युग के एक प्रमुख कवि थे।  

प्रमुख रचना: 'प्रिय प्रवास' (खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य)।  

काव्यगत विशेषताएँ:

खड़ी बोली का प्रयोग: उन्होंने संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली के प्रयोग को स्थापित किया।

परंपरागत और नवीनता का समन्वय: उनके काव्य में प्राचीन आदर्शों और आधुनिक चेतना का सुंदर मेल मिलता है।

लोक-सेवा की भावना: उनके पात्रों (जैसे 'प्रिय प्रवास' की राधा) में लोक-कल्याण और सेवा का भाव प्रमुख है।

4. छायावाद की विशेषताएँ (इकाई-4)

छायावाद हिंदी साहित्य में 1918 से 1936 तक चलने वाली एक प्रमुख काव्य-धारा है।  

विशेषताएँ:

व्यक्तिवाद की प्रधानता: कवि ने स्वयं के सुख-दुःख की अभिव्यक्ति को महत्व दिया।

प्रकृति का मानवीकरण: प्रकृति को चेतन सत्ता मानकर उसमें मानवीय भावनाओं का आरोपण किया गया।

प्रेम और सौंदर्य का चित्रण: प्रेम की सूक्ष्म और उदात्त अभिव्यक्ति हुई।

रहस्यवाद: अलौकिक सत्ता के प्रति जिज्ञासा और विस्मय का भाव।

खंड 'स': वस्तुनिष्ठ प्रश्न (इकाई-5)

निर्देश: निम्नलिखित में से किन्हीं 15 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (1x15 अंक)

इकाई-5 -- प्रश्नोत्तर

इकाई–5 : वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर (1×15)

(1) "भारत-भारती" कविता के रचयिता का नाम लिखिए ।
(2) राष्ट्रीय काव्य-धारा के एक प्रमुख कवि का नाम लिखिए ।
(3) "अज्ञेय" का पूरा नाम लिखिए ।
(4) "प्रकृति के सुकुमार कवि" किसे कहा जाता है ?
(5) "साम्राज्ञी का नैवधदान" किस कवि की रचना है ?
(6) प्रयोगवाद की दो विशेषताएँ लिखिए ।
(7) छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भों के नाम लिखिए ।
(8) "सरस्वती" पत्रिका के संपादक का नाम लिखिए ।
(9) "पंत जी" की दो रचनाओं के नाम लिखिए ।
(10) "सुभद्रा कुमारी चौहान" की एक प्रसिद्ध कविता का नाम लिखिए ।
(11) "मैं बेच रही हूँ दही" कविता के कवि का नाम लिखिए ।
(12) भारतेन्दु युग के दो प्रमुख कवियों के नाम लिखिए ।
(13) "दूर्वांचल" किसकी रचना है ?
(14) "कविता की मुक्ति" को "मनुष्य की मुक्ति" से जोड़ने का आदर्श किसने दिया ?
(15) "वादल" किस कवि की रचना है ?
(16) "शेखर एक जीवनी" उपन्यास किसने लिखा है ?

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Thanks for reading: B.A. Part-II (Two) Term End Examination, 2021-22 HINDI LITERATURE Paper-I, Sorry, my English is bad:)

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